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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ‘मिसिंग लिंक’ का हो गया लोकार्पण, जाम से मिलेगा छुटकारा, 6 किमी घट गई दूरी

 Reported By: Sachin Chaudhary Edited By: Sourabha Suman
 Published : May 01, 2026 06:06 pm IST,  Updated : May 01, 2026 06:16 pm IST

मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर सफर अब आसान हो जाएगा। करीब 6 किलोमीटर के इस घाट सेक्शन में भारी जाम लग जाता था। आज से इसके खुलने से लोगों को आवाजाही में काफी राहत मिलेगी।

यशवंतराव चव्हाण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ का स्ट्रेच।- India TV Hindi
यशवंतराव चव्हाण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ का स्ट्रेच। Image Source : IMAGE POSTED ON X BY @DEV_FADNAVIS

मुंबई में महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार, 1 मई को यशवंतराव चव्हाण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ स्ट्रेच का उद्घाटन किया। इस प्रोजेक्ट से ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं में भारी कमी आएगी और यात्रा पूरी तरह सिग्नल-फ्री, तेज और सुरक्षित बनेगी। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। यह परियोजना राज्य में बेहतर समन्वय और तेज यातायात की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट में लगभग 22.33 मीटर चौड़ी एक सुरंग शामिल है, जिसे दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंग के तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के दावेदार के रूप में पेश किया गया है।

प्रोजेक्ट की बड़ी खासियतें

  • लंबाई: लगभग 10.5 किमी
  • दो विशाल टनल (दुनिया के सबसे चौड़ी अंडरग्राउंड टनल में शामिल 22.33 मीटर चौड़ी टनल 
  • टाइगर वैली पर 182 मीटर ऊंचा केबल-स्टेड ब्रिज
  • ऊंचे वायाडक्ट और आधुनिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल
  • तेज बारिश, 70 किमी/घंटा हवाओं और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में निर्माण
  • लोनावाला तालाब के 182 मीटर नीचे से अंडर टनल बनाया है 

ऊंचाई ‘मिसिंग लिंक’ की है खासियत

मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ में बना केबल-स्टे ब्रिज वाकई इंजीनियरिंग का शानदार नमूना माना जा रहा है। इस ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत इसकी करीब 182 मीटर की ऊंचाई है, जो इसे भारत के सबसे ऊंचे केबल-स्टे ब्रिजों में शामिल करती है। इसमें कुल 240 केबल्स लगाए गए हैं, जो पूरे स्ट्रक्चर को मजबूती देते हैं और इसे संतुलित रखते हैं। डिजाइन के लिहाज से यह ब्रिज बेहद एडवांस्ड है। तेज हवाओं और आंधी-तूफान को ध्यान में रखते हुए इसे इस तरह बनाया गया है कि लगभग 240 किमी/घंटा तक की हवा की रफ्तार में भी इसकी संरचना और इस पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा बनी रहे।

इस पूरे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट में वैश्विक स्तर की तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। कनाडा, डेनमार्क, स्पेन, ऑस्ट्रिया, सिंगापुर और ताइवान समेत कई देशों की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता इसमें शामिल रही। हालांकि, इसका असली निर्माण भारत की ही प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों ने किया है, जो “मेक इन इंडिया” के लिहाज से भी बड़ी बात मानी जा रही है। कुल मिलाकर, यह ब्रिज सिर्फ एक कनेक्टिंग लिंक नहीं, बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है।

कितना बदलेगा सफर?

  • यात्रा समय 30 मिनट से कम
  • एक्सप्रेसवे की दूरी करीब 6 किमी घटेगी
  • घाट के खतरनाक मोड़ों से पूरी तरह छुटकारा मिलेगा 
  • शुरुआती चरण में कार और बसों को प्राथमिकता

मुंबई से पुणे की यात्रा लंबे समय तक लोगों के लिए परेशानी का सबब रही है। मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर सफर शुरू करते ही जहां कुल समय 3 से 4 घंटे तक पहुंच जाता था, वहीं सबसे बड़ी चुनौती खालापुर टोल पार करने के बाद लोनावला-खंडाला घाट सेक्शन में देखने को मिलती थी। करीब 6 किलोमीटर के इस घाट सेक्शन में अक्सर भारी जाम लग जाता था। कई बार कुछ मिनटों का जाम घंटों में बदल जाता और लोगों को 1 से 2 घंटे तक फंसे रहना पड़ता था। स्थिति तब और खराब हो जाती थी जब कोई टैंकर या भारी वाहन पलट जाता, जिससे पूरा हाईवे 8–9 घंटे तक ठप हो जाता था।

टोल को लेकर राहत

  • टोल में कोई बढ़ोतरी नहीं
  • खालापुर टोल पर भी फिलहाल कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं

सुरक्षा और पर्यावरण पर असर

  • दुर्घटनाएं लगभग शून्य होने का दावा
  • ईंधन की बचत
  • प्रदूषण में कमी
  • समय की बचत से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा

प्रोजेक्ट की लागत और पृष्ठभूमि

  • कुल लागत: लगभग ₹7100 करोड़
  • मंजूरी: 2015 (तब भी मुख्यमंत्री थे देवेंद्र फडणवीस)
  • निर्माण: महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल
  • इस प्रोजेक्ट से मुंबई पुणे के परिसर की कनेक्टिविटी बढ़ेगी और 70 हज़ार करोड़ के इकॉनमी को बूस्ट मिलेगा 

पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

  • इस प्रोजेक्ट से लोहगड किला, विसापुर किला और कार्ला लेणी जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच और आसान होगी।
  • टनलों को भी गढ़-किलों और कार्ला गुफाओं की थीम पर सजाया गया है।

आगे की योजना

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इस प्रोजेक्ट को जोड़कर एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया जाए, जिसमें शामिल हैं:

  • समृद्धि महामार्ग
  • कोकण कोस्टल रोड
  • वसई-विरार मल्टीमोडल कॉरिडॉर
  • लक्ष्य: महाराष्ट्र के किसी भी कोने से दूसरे कोने तक 7–8 घंटे में यात्रा

‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट सिर्फ एक रोड प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि मुंबई–पुणे के बीच सफर को पूरी तरह बदलने वाला गेमचेंजर है। यह तेज,सुरक्षित,बिना रुकावट और आर्थिक विकास को रफ्तार देने वाला प्रोजेक्ट है।

लोकार्पण से पहले लग गया था जाम

महाराष्ट्र में आज मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे मिसिंग लिंक परियोजना के लोकार्पण से पहले ही मुंबई–पुणे मार्ग पर भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिला। लोनावला-खंडाला घाट सेक्शन में हालात ऐसे हो गए कि लोगों को 1 से 2 घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ा, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। इस ट्रैफिक जाम को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई। एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले भी इस जाम में फंसीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराज़गी जताते हुए कहा कि सरकार के कार्यक्रम की वजह से यह जाम लगा है और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ट्रैफिक जाम को लेकर खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज लोगों को जो परेशानी हुई, उसके लिए उन्हें दुख है। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जाम की वजह अलग बताई। उनके अनुसार, यह जाम किसी कार्यक्रम की वजह से नहीं बल्कि वीकेंड और महाराष्ट्र दिवस की छुट्टी के कारण लगा, जब बड़ी संख्या में लोग मुंबई से बाहर निकले। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को तुरंत ट्रैफिक नियंत्रित करने के निर्देश दे दिए गए हैं और स्थिति को सामान्य करने की कोशिश जारी है।

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